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"हम लोगों की चेतना माया के बादल से ढकी हुई हैं, इसीलिए श्रीगौड़ीय मठ के आदि प्रभुपाद की यह प्रतिज्ञा रही कि कैसे जगत के सामने परम सत्य वास्तु कि उपस्थापना की जा सके, जैसे की हिमालय का सबसे ऊँचा श्रृंग जोकि माउंट एवेरेस्ट के नाम से परिचित है, वो हर वक्त बादलों के ऊपर सर उठाकर जगे रहता हैं।"
— बाबा श्रीश्याम दास
শ্রবনাগার
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